Gonda District of Uttar Pradesh at a Glance

About Gonda District :

The district lies between 26º 47′ and 27º- 20′ north latitude and 81º 30′ and 82º 46′ east longitude It is head quarter of Devi Patan division which was constituted by praline of Faizabad division District Balrampur makes its boundaries in north. To its west it is bounded by district Bahraich and some part of Srawasti on the east by the district Basti . In the south it is separated from district’s Bara Banki and Faizabad by the river Ghaghara . In shape it is very irregular and seems as Cup widest in North narrowest in south . It has got physical boundaries on two sides Kuon river in the North and as Ghaghar a river in the South. Its length from Jarwal road in the West to Katra (Shivadayal Ganj) is 106 kms and width from kuaon in the north to Paska in the south is 77 kms.

Before the division of district in 1997 it cover’s on area of 7331 sq. km. on 25 May 1997 a new district Balrampur was constituted by separation of its 40% northern parts . Remaining area of the district Gonda is now 4448sq. kms. Owing to the fluvial action Ghaghara frequent changes take place in the area of the district

District at a Glance :

  • District – 
  • Headquarters – 
  • State
Area in Sq Km (Census 2011)
  • Total – 
  • Rural – 
  • Urban – 
Population (Census 2011)
  • Population –
  • Rural – 
  • Urban – 
  • Male – 
  • Female – 
  • Sex Ratio (Females per 1000 males) – 
  • Density (Total, Persons per sq km) – 
Constituencies (ECI)
  • Assembly
  • Loksabha

Tourist Places :

स्वामी नारायण छपिया :
स्वामी नारायण छपिया मन्दिर गोंडा जिला मुख्यालय से 50 कि०मी० पूर्व और स्वामी नारायण छपिया रेलवे स्टेशन से 1.5 कि०मी दक्षिण में स्थित है । यह स्थल हिन्दू संत स्वामी सहजानन्द (घनश्याम पाण्डेय या स्वामी नारायण ) की पावन जन्म भूमि है जिनका जन्म 3 अप्रैल, 1781 (चैत्र शुक्ल 9, वि.संवत 1837) को हुआ था । स्वामी जी ने अनेक मंदिरों का निर्माण कराया, इनके निर्माण के समय वे स्वयं सबके साथ श्रमदान करते थे।धर्म के प्रति इसी प्रकार श्रद्धाभाव जगाते हुए स्वामी जी ने 1830 ई0 में देह छोड़ दी।

तिरर मनोरमा :
गोण्डा शहर के उत्तर से २१ किलोमीटर की दूरी पर यह पवित्र स्थान स्थित है। माना जाता है कि यहाँ पर मुनि उद्दालक का आश्रम स्थित है। इसके अलावा यहीं से मनोरमा नदी की उत्पत्ति हुई थी। साथ ही यहाँ पक्का घाट के साथ प्राचीन सरोवर और मण्दिर स्थित है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ मेले का आयोजन किया जाता है।

पृथ्वीनाथ मंदिर :
पृथ्वीनाथ मंदिर ,भगवान शिव का बहुत बड़ा मंदिर है जो कि गोंडा से लगभग 12 कि०मी० दूर इटियाथोक ब्लाक में पड़ता है । इस मंदिर का शिवलिंग बहुत ऊँचा है । यहाँ हर साल शिवरात्रि के दिन बहुत ही भव्य मेला लगता है ।

पसका :
जिला मुख्यालय के दक्षिण-पश्चिम से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पसका सरयू नदी के तट पर स्थित है। यह काफी प्राचीन संगम स्नान स्थल है। पशु-योनि से मुक्ति पाने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान करने के लिये यहाँ आते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान वराह ने इस जगह पर अवतार लिया था।

गोस्वामी तुलसीदास जन्मस्थली :
इसी जनपद के परसपुर ब्लाक के राजापुर नामक गाँव में रामचरितमानस के जैसे महाकाव्य के रचनाकार की जन्मस्थली भी है। सरयू नदी के उत्तर में राजापुर गाँव है जहाँ पर तुलसीदास का जन्म हुआ था। साथ ही साथ सूकरखेत में गोस्वामी जी के गुरु नरहरिदास की मूर्ति एक जीर्ण-शीर्ण मन्दिर में मौजूद है।

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